वीबी—जी राम जी कानून: जिसके शीर्षक में सिर्फ राम नाम सत्य है, बाकी माया है
नये रोज़गार कानून के नाम के जिस भी हिस्से पर नज़र डालो, राग दरबारी के ट्रक की तरह, खामियां ही खामियां नज़र आती हैं

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (अंग्रेजी में Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act 2005 और संक्षेप में मनरेगा) की जगह एक नया कानून लाया गया है. नये कानून में ऐसे कई बदलाव हैं जो जरूरी लगते हैं. लेकिन इसने ग्रामीण क्षेत्रों को रोज़गार का अधिकार देने वाली व्यवस्था को सर के बल खड़ा करने का काम भी किया है. पर हमें इस कानून में मौजूद सही-गलत की बात नहीं करनी. हमें तो बस इस कानून के नाम की बखिया उधेड़नी है. क्यों? इसलिए कि वह है ही इसी लायक.
मनरेगा की जगह आये नये कानून का अंग्रेजी टाइटल है: “Viksit Bharat—Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB—G RAM G (विकसित भारत—जी राम जी) Act, 2025.”
और हिंदी में इस कानून का आधिकारिक शीर्षक है: विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी—जी राम जी (विकसित भारत—जी राम जी) अधिनियम, 2025.
श्रीलाल शुक्ल ने राग दरबारी की शुरुआत में लिखा था कि जब ट्रांसपोर्ट विभाग के कुछ कर्मचारी एक ट्रक का मुआयना करते हैं तो वे उसकी जिस चीज़ को छूते हैं वही खराब निकलती है. शुक्ल ने यह बात ट्रक की हालत और अफसरों के भ्रष्टाचार को दिखाने के लिए व्यंग्य के तौर पर लिखी थी. लेकिन ऐसा ही कुछ इन दोनों शीर्षकों के बारे में भी कहा जा सकता है. इनके जिस भी हिस्से पर नज़र डालो गड़बड़ी ही नज़र आती है.
पहले बात करते हैं अंग्रेज़ी के शीर्षक की. इस बहुत बड़े और जटिल शीर्षक में मुख्यत: तीन शब्द अंग्रेज़ी के हैं (Guarantee, Mission, Act), चार शब्द हिंदी के (विकसित, भारत, जी, राम), और पांच रोमन में लिखी हिंदी के (Viksit, Bharat, Rozgar, Ajeevika, Gramin). अंग्रेज़ी शीर्षक में इन शब्दों से बने उसके विचित्र से संक्षिप्त नाम भी रोमन (VB—G RAM G) और देवनागरी (विकसित भारत—जी राम जी) दोनों लिपियों में हैं.
किसी कानून के शीर्षक को इतना लंबा और भानुमती के कुनबे जैसा बनाने की जरूरत क्या थी? मनरेगा कानून का आधिकारिक नाम सिर्फ सात शब्दों का था (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) वहीं नया कानून 20 शब्दों का है. पुराने कानून में भी अगर चाहते तो दो शब्द (Mahatma Gandhi) कम हो सकते थे, पक्का है कि बापू इससे दुखी नहीं होते. तब वह सिर्फ 5 शब्दों का रह जाता — National Rural Employment Guarantee Act.

