कीर स्टार्मर: ब्रिटेन का ऐसा नेता जिसके पास गलतियों की गुंजाइश न के बराबर थी
ब्रिटेन के पिछले आम चुनावों में कीर स्टार्मर की लेबर पार्टी ने ऐतिहासिक जीत तो हासिल की थी लेकिन उस जीत की बुनियाद बेहद कच्ची थी

ब्रिटेन की राजनीति में पिछले कुछ सालों से जो उथल-पुथल चल रही है, उसमें एक अध्याय और जुड़ गया है. महज़ दो साल पहले लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. वे पिछले 10 सालों में ब्रिटेन के छठे ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. देश को आने वाले कुछ हफ्तों-महीनों में अपना नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा. लेकिन जिस तरह के हालात हैं, 2029 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले उसे अपना अगले से अगला प्रधानमंत्री भी मिल सकता है.
जब 2024 के आम चुनाव में कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी को एक बड़ी जीत दिलाई थी, तो उन्हें पार्टी का तारणहार माना जा रहा था. इससे पहले लेबर पार्टी ने आखिरी बार 2005 का राष्ट्रीय चुनाव जीता था और 2019 में उसे 1935 के बाद की अपनी सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन कीर स्टार्मर की जीत वैसी थी नहीं जैसी ऊपर से लगती थी. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक वह एक ‘लवलेस लैंडस्लाइड’ यानी ऐसी जीत थी जिसमें जनता का प्यार या भरोसा शामिल नहीं था.
2024 के चुनाव में लेबर पार्टी ने हाउस ऑफ कॉमंस की कुल 650 में से 411 यानी 63 फीसदी सीटें जीती थीं. जबकि इस चुनाव में उसे सिर्फ 33 फीसदी वोट ही मिले थे. संख्या के मामले में ये वोट 2019 के उस चुनाव से भी कम थे जिसमें पार्टी की ऐतिहासिक हार हुई थी. ऐसे में विश्लेषकों का मानना था कि कीर स्टार्मर को मिली जीत उनकी या लेबर पार्टी की जीत नहीं थी, बल्कि तत्कालीन कंजर्वेटिव (टोरी) सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा था. लोग किसी भी कीमत पर बदलाव चाहते थे इसलिए टोरी समर्थक या तो रिफॉर्म यूके जैसी पार्टियों के पाले में चले गये या उन्होंने वोट ही नहीं डाला. नतीजतन वह सिर्फ 23 फीसदी वोटों और 121 सीटों पर ही सिमटकर रह गई और कीर स्टार्मर को इतनी बड़ी जीत मिल गई.

