जब आइंस्टीन के कमरे में न्यूटन की जगह गांधी ने ले ली
एक समय आइंस्टीन के कमरे में न्यूटन और मैक्सवेल के चित्र लगे थे. फिर ऐसा क्या हुआ कि उनकी जगह गांधी और श्वाइट्ज़र की तस्वीरें लग गईं?
अव्यक्त
दुनिया के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टीन अपना आदर्श किसे मानते थे? इस सवाल का जवाब जल्दबाजी में देंगे तो गलती हो सकती है. अपने जीवन के शुरुआती दौर में वे दो महान वैज्ञानिकों को अपना आदर्श मानते थे. ये वैज्ञानिक थे — आइज़ैक न्यूटन और जेम्स मैक्सवेल. तब उनके कमरे में इन्हीं दोनों के चित्र लगे थे.
बाद में दुनिया भर में घट रही तरह-तरह की हिंसक त्रासदियों को देखने के बाद आइंस्टीन ने इन दोनों चित्रों को हटा दिया और उनकी जगह दो नई तस्वीरें लगा दीं.. अपने जीवन के शुरुआती दौर में एक वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने दो महान वैज्ञानिकों को ही अपना आदर्श माना था. ये वैज्ञानिक थे — आइज़ैक न्यूटन और जेम्स मैक्सवेल. तब उनके कमरे में इन्हीं दोनों के चित्र लगे रहते थे.
बाद में दुनिया भर में घट रही तरह-तरह की हिंसक त्रासदियों को देखने के बाद आइंस्टीन ने अपने घर में लगे इन दोनों चित्रों को हटा दिया और उनकी जगह दो नई तस्वीरें लगा दीं. इनमें से एक तस्वीर थी महान मानवतावादी अल्बर्ट श्वाइट्ज़र की और दूसरी महात्मा गांधी की. इसे स्पष्ट करते हुए आइंस्टीन ने उस समय कहा था — ‘समय आ गया है कि हम सफलता की तस्वीर की जगह सेवा की तस्वीर लगा दें.’
लेकिन महात्मा गांधी के साथ-साथ अल्बर्ट श्वाइटज़र की तस्वीर क्यों? इस पर आइंस्टीन का कहना था — ‘पश्चिम में अकेले अल्बर्ट श्वाइट्ज़र ही ऐसे हैं जिनका इस पीढ़ी पर उस तरह का नैतिक प्रभाव पड़ा है, जिसकी तुलना गांधी से की जा सकती हो. गांधी की तरह श्वाइट्ज़र का भी इतना प्रभाव इसलिए पड़ सका, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन से इसका उदाहरण पेश किया.’
इस प्रसंग से आगे बढ़ने से पहले यह भी देखते चलें कि आइंस्टीन के आदर्श श्वाइट्ज़र स्वयं महात्मा गांधी के बारे में क्या सोचते थे. ‘गांधी का जीवन-दर्शन अपने आप में एक संसार है,’ श्वाइट्ज़र ने भारत पर केंद्रित अपनी पुस्तक ‘इंडियन थॉट एंड इट्स डेवलपमेंट’ में लिखा, ‘गांधी ने बुद्ध की शुरू की हुई यात्रा को ही जारी रखा है. बुद्ध के संदेश में प्रेम की भावना दुनिया में अलग तरह की आध्यात्मिक परिस्थितियां पैदा करने का लक्ष्य सामने रखती है. लेकिन गांधी तक आते-आते यह प्रेम केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि समस्त सांसारिक परिस्थितियों को बदल डालने का कार्य अपने हाथ में ले लेता है.’



