पिछले दिनों दुनिया की सबसे बड़ी एआई कंपनियों में से एक एंथ्रोपिक के 27 वर्षीय शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने अपनी नौकरी छोड़ दी. इससे पहले वे चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई में काम करते थे. कॉक्सन ने इस बार किसी बेहतर नौकरी या सैलरी के लिए इस्तीफा नहीं दिया था. एक्स पर इसकी वजह बताते हुए उन्होंने लिखा:
“एआई बनाने वाले लोग सचमुच मानते हैं कि इस दशक के अंत तक वह हम सभी की जान ले सकती है. यह कोई मार्केटिंग हथकंडा नहीं है. कई अधिकारी और वरिष्ठ शोधकर्ता मीडिया के सामने अपनी बात संभलकर रखते हैं, लेकिन निजी बातचीत में वे भी यही डर जाहिर करते हैं. कोई दूसरी इंसानी गतिविधि हमारे लिए इतना बड़ा खतरा नहीं है.”
एंथ्रोपिक में उनके एक वरिष्ठ सहयोगी इवान ह्यूबिंगर उनकी इस बात से सहमति जताते हुए एक्स पर ही लिखते हैं, “जैकब यहां सही हैं. हम सचमुच मानते हैं कि एआई सभी इंसानों की जान ले सकती है. मुझे निजी तौर पर लगता है कि अगले दस साल में इसकी आशंका 10 फीसदी से ज्यादा है.”
आम तौर पर ऐसी पोस्ट कुछ समय तक सोशल मीडिया पर चर्चा में रहती हैं और फिर उसके अथाह समंदर में खो जाती हैं. लेकिन इस बार बात कुछ और थी.
इसकी वजह थी ओपनएआई के भीतर हाल ही में घटी एक असाधारण घटना जिसे “हगिंग फेस प्रकरण” कहा जा रहा है. हगिंग फेस दरअसल एक लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है जहां डेवलपर एआई मॉडल, डेटासेट और सॉफ्टवेयर कोड साझा करते हैं. इसे एआई की दुनिया का गिटहब माना जाता है.०९
इस घटना ने एक चौंकाने वाली बात हमारे सामने रखी—जब सामने मुश्किल लक्ष्य हो और उसे हासिल करने का प्रलोभन भी बड़ा हो, तो एआई भी काफी हद तक हम इंसानों जैसा ही बर्ताव करती है…
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